परिचय
राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चलाए जा रहे ग्रामीण सेवा शिविर 2025 और शहरी सेवा शिविर आमजन के लिए राहतकारी और जीवन बदलने वाली पहल साबित हो रहे हैं। इन शिविरों में लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है और जरूरतमंदों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
प्रतापगढ़ जिले में कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया के निर्देशन में जिलेभर की विभिन्न ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में इन शिविरों का आयोजन हो रहा है।
घटना का विवरण
- शहरी सेवा शिविर:
आयुक्त नगर परिषद ने जानकारी दी कि नगर परिषद प्रतापगढ़ में 24 सितंबर को वार्ड संख्या 6 से 10 के लिए शिविर आयोजित हुआ। इसके बाद 25 से 27 सितंबर तक वार्ड संख्या 11 से 15 के लिए शिविरों का आयोजन किया जाएगा। - ग्राम सेवा शिविर (25 सितंबर):
- प्रतापगढ़ ब्लॉक: अचलपुर (राजीव गांधी सेवा केन्द्र), बड़ीलांक (राजीव गांधी सेवा केन्द्र)
- छोटीसादड़ी ब्लॉक: ग्राम पंचायत सियाखेड़ी और ईटो का तालाब (राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर)
- अरनोद ब्लॉक: ग्राम पंचायत भवन कोटड़ी और मोवाई
- सुहागपुरा ब्लॉक: पीएम श्री राउमावि सुहागपुरा और ग्राम पंचायत मोटी-खेड़ी का राउमावि
- पीपलखूंट ब्लॉक: ग्राम पंचायत मुख्यालय साग-बाड़ी और केला-मेला
- दलोट ब्लॉक: ग्राम पंचायत मुख्यालय अंबीरामा और लुहार खाली
- धमोत्तर ब्लॉक: नकोर और देवपुरा (राजीव गांधी सेवा केन्द्र)
- धरियावद ब्लॉक: ग्राम पंचायत भरकुंडी और ग्राम पंचायत पारसोला
पृष्ठभूमि
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण और शहरी जनता को प्रशासनिक सेवाएं उनके दरवाजे तक पहुंचाने के उद्देश्य से इन शिविरों की शुरुआत की है। परंपरागत रूप से ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए कई बार जिला मुख्यालय तक आना पड़ता था। लेकिन अब इन शिविरों में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और पंचायत से जुड़ी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण
कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने बताया कि शिविरों का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच दूरी को कम करना है। शिविरों में आने वाले आवेदनों का तुरंत निस्तारण किया जा रहा है।
नगर परिषद आयुक्त ने कहा कि शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से नगर के विभिन्न वार्डों के नागरिकों को सुविधा, स्वच्छता, कर और योजनाओं से जुड़ी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ग्रामीणों और नागरिकों की प्रतिक्रियाएँ
- ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार तहसील या जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ रहा है।
- महिलाओं और बुजुर्गों को शिविरों से विशेष राहत मिल रही है क्योंकि योजनाओं की जानकारी और लाभ उन्हें सीधे वहीं मिल रहा है।
- युवा वर्ग ने इन शिविरों को रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से जोड़ने की मांग भी उठाई।
आँकड़े और तथ्य
- एक शिविर में औसतन 400-500 आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।
- इनमें से 70-80% आवेदन मौके पर ही निस्तारित किए जा रहे हैं।
- सबसे अधिक मांग राजस्व रिकॉर्ड सुधार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, उज्ज्वला और जन आरोग्य योजना से संबंधित है।
भविष्य की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पहल को लगातार गति दी जाए तो ग्रामीण और शहरी प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस को जोड़कर इन शिविरों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।





