आगर मालवा

आगर मालवा में होम कंपोस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम | महिलाओं को घरेलू कचरे से खाद बनाने की दी गई जानकारी

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वार्ड 21 की महिलाओं को घरेलू कचरे से खाद बनाने की दी गई जानकारी

आगर मालवा। नगर पालिका परिषद आगर ने स्वच्छता सेवा अभियान के अंतर्गत बुधवार को एक विशेष होम कंपोस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में एसके मैनेजमेंट सर्विस की टीम ने वार्ड 21 की महिलाओं और स्वयं सहायता समूह की सदस्यों को घरेलू स्तर पर गीले कचरे का सही उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाने की विधि समझाई।

गीले कचरे से बनेगी पर्यावरण हितैषी खाद

प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि घरों से निकलने वाले गीले कचरे को सही तरीके से अलग करके और साधारण तकनीक से खाद में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया से न केवल घर के आसपास का वातावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि तैयार खाद बागवानी और खेती के लिए भी उपयोगी साबित होगी। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन लिविंग की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

प्लास्टिक मुक्त जीवन की ओर कदम

कार्यक्रम में प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि पॉलीथिन और प्लास्टिक बैग पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसी कारण कपड़े के थैले और अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने पर जोर दिया गया।

इस दौरान नगर पालिका द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों से तैयार किए गए कपड़े के थैले भी वितरित किए गए। यह पहल न केवल प्लास्टिक उपयोग में कमी लाएगी, बल्कि समूह की महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर भी प्रदान करेगी।

प्रमुख अतिथि और सहभागिता

कार्यक्रम में नगर पालिका के स्वच्छता निरीक्षक बसंत डुलगज, एसके वेस्ट मैनेजमेंट टीम से सूरज चौहान, हेमंत बैरागी और अनीता पांचाल उपस्थित रहे। उन्होंने महिलाओं को व्यावहारिक रूप से कंपोस्ट बनाने की विधियां बताईं और घरेलू स्तर पर इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया।

महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। घरेलू कचरे से तैयार खाद स्थानीय स्तर पर बेची जा सकती है, जिससे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

नागरिकों से अपील

नगर पालिका ने नागरिकों से अपील की कि वे घरों में गीले और सूखे कचरे को अलग करें और कंपोस्टिंग की प्रक्रिया अपनाएँ। साथ ही प्लास्टिक का उपयोग त्यागकर कपड़े व जूट के थैलों का प्रयोग करें। इससे शहर को स्वच्छ बनाने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।