रतलाम। दिल्ली में बुधवार को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के उत्पादकता से जुड़े बोनस (पीएलबी) की घोषणा की। इस घोषणा के तुरंत बाद वेस्टर्न रेलवे के रतलाम रेल मंडल ने रात तक रेल कर्मचारियों के खातों में बोनस की राशि पहुंचा दी। इस मामले में रतलाम रेल मंडल भारतीय रेलवे में सबसे आगे रहा।
केंद्रीय मंत्रीमंडल की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को 10,91,146 रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के उत्पादकता से जुड़े बोनस के रूप में 1865 करोड़ 68 लाख रुपए भुगतान की स्वीकृति दी।
स्वीकृति मिलते ही रेल कर्मचारियों में दशहरे और दीपावली के पूर्व बोनस मिलने की उम्मीद जाग गई। केंद्रीय मंत्रीमंडल की इस घोषणा का उद्देश्य कर्मचारियों को उत्सव के अवसर पर आर्थिक राहत प्रदान करना है।
रतलाम रेल मंडल की तेजी
स्वीकृति मिलते ही रतलाम रेल मंडल के अधिकारी और कर्मचारी रेल कर्मचारियों के खातों में राशि पहुंचाने में जुट गए। रात 9 बजे तक रतलाम रेल मंडल ने 12292 कर्मचारियों के खातों में 21 करोड़ 55 लाख 84 हजार 623 रुपए का बोनस जमा कर दिया।
प्रत्येक पात्र रेल कर्मचारी को 17,951 रुपए का बोनस राशि मिली। यह नियमित रूप से दुर्गा पूजा, दशहरा और दीवाली के पहले रेलवे द्वारा जारी किया जाता है।
बाजार और त्योहारों पर असर
समय से पहले बोनस मिलने से इसका असर त्योहारों के समय बाजार पर भी देखने को मिलेगा। यह राशि न केवल रेल कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि बाजार में खर्च बढ़ने की संभावना भी दर्शाती है।
दुकानदार और कारोबारी दीवाली के दौरान खपत और मांग में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, खासकर हाल ही में जीएसटी में की गई कटौती के बाद।
अधिकारियों का बयान
रतलाम रेल मंडल के डीआरएम अश्वनी कुमार ने बताया:
“केंद्रीय मंत्रीमंडल द्वारा बोनस की स्वीकृति दी गई है। हमने रात तक रेल कर्मचारियों के खातों में राशि रिलीज कर दी है। राशि रिलीज करने में रतलाम रेल मंडल सबसे आगे रहा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारियों की सुविधा और उत्सव के समय आर्थिक राहत के लिए मंडल ने पूरी तेजी से काम किया।
निष्कर्ष
रतलाम रेल मंडल की यह पहल कर्मचारियों के उत्सव और बाजार पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। समय पर बोनस जारी करने से न केवल कर्मचारियों की खुशी बढ़ी है, बल्कि त्योहारों के दौरान खपत और आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी की संभावना है। इस प्रकार यह कदम रेलवे प्रशासन की तत्परता और दक्षता का उदाहरण भी बन गया है।





