प्रतापगढ़

बहुचर्चित सागवान चोरी प्रकरण में आरोपी प्रकाश को अदालत ने किया दोषमुक्त

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पुलिस की लापरवाही और अवैध कार्रवाई पर न्यायालय ने उठाए गंभीर सवाल

धरियावद, राजस्थान। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सरफराज नवाज ने साल 2020 के बहुचर्चित सागवान चोरी प्रकरण में आरोपी प्रकाश को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में पुलिस द्वारा की गई गंभीर लापरवाही और अवैध कार्रवाई को रेखांकित करते हुए कहा कि आरोपी को मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर झूठा फंसाया गया


न्यायालय का आदेश और पुलिस अधिकारियों पर संदेह

न्यायालय ने एएसआई कंवरलाल, एएसआई छबिलाल और मालखाना इंचार्ज शंकरलाल की भूमिका संदिग्ध मानते हुए विभागीय जांच का आदेश दिया। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए।


मामला क्या था?

मामला थाना धरियावद क्षेत्र का है। 16 अगस्त 2020 को एएसआई कंवरलाल ने आरोपी प्रकाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन्होंने दावा किया कि आरोपी के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित 73 सागवान गट्टे जब्त किए गए हैं।

लेकिन न्यायालय में प्रस्तुत मालखाना रजिस्टर और साक्ष्यों के आधार पर यह तथ्य सामने आया कि केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली जमा कराई गई थी, जबकि 73 सागवान गट्टों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।


जांच और साक्ष्यों में विरोधाभास

विचारण के दौरान यह खुलासा हुआ कि—

  • न तो जब्त किए गए 73 सागवान गट्टे न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
  • न ही जब्ती के समय उनका कोई फोटोग्राफ सबूत के रूप में लिया गया।
  • अनुसंधान के दौरान भी विशेषज्ञ से लकड़ी का वर्गीकरण नहीं कराया गया।

अदालत ने टिप्पणी की कि या तो पूरा मुकदमा मनगढ़ंत था और आरोपी को झूठा फंसाया गया, या फिर जब्त सागवान गट्टों को खुर्द-बुर्द कर अवैध लाभ उठाया गया।


आरोपी के अधिवक्ता का पक्ष

आरोपी के अधिवक्ता सैयद मोहम्मद इरफान ने अदालत को बताया कि पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदेहास्पद रही।

  • जब्ती अधिकारी कंवरलाल और अनुसंधान अधिकारी छबिलाल ने कहा कि गट्टे मालखाना में जमा कराए गए थे,
  • जबकि मालखाना इंचार्ज शंकरलाल ने केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली जमा कराने की बात मानी।

इस विरोधाभास ने न्यायालय में पुलिस कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।


पुलिस महानिदेशक को जांच का आदेश

अदालत ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस महानिदेशक, रेंज उदयपुर उक्त तीनों पुलिसकर्मियों की भूमिका की गहन जांच कराएं।

  • दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विधि अनुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
  • संपूर्ण जांच रिपोर्ट 18 नवंबर 2025 तक न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।

निष्कर्ष

सागवान चोरी प्रकरण में आरोपी प्रकाश की दोषमुक्ति यह संदेश देती है कि पुलिस की लापरवाही और मनगढ़ंत कार्रवाई की गंभीरता न्यायालय द्वारा नहीं नजरअंदाज की जाती। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की कार्यवाही में पुलिस और अधिकारियों की विश्वसनीयता सर्वोपरि है।

यह प्रकरण यह भी दर्शाता है कि साक्ष्य और दस्तावेजों की सत्यता के बिना आरोप लगाना न केवल किसी निर्दोष को फंसाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है, बल्कि इससे सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।