उदयपुर। शहर में विजयादशमी महोत्सव को लेकर तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों को बनाने का काम अंतिम चरण में है। पहले 70 फीट का रावण बनाया जा रहा था, लेकिन इस बार इसे 75 फीट तक बढ़ा दिया गया है।
उदयपुर के शक्तिनगर में मथुरा से आए कलाकार गांधी ग्राउंड में दशहरा महोत्सव के लिए पुतले तैयार कर रहे हैं। इसी स्थान पर शहर और जावरमाइंस में होने वाले रावण दहन के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं।
इस बार की लंका और आतिशबाजी
महासभा पूज्य श्री बिलोचिस्तान पंचायत और श्री सनातन धर्म सेवा समिति 2 अक्टूबर को गांधी ग्राउंड (महाराणा भूपाल स्टेडियम) में विजयादशमी मनाएगी। महासचिव विजय आहूजा ने बताया कि इस बार महोत्सव और भी भव्य होगा। उन्होंने कहा कि दशहरा की यह परंपरा उनके पूर्वजों ने हिंदुस्तान आने के बाद शुरू की थी और आज तीसरी पीढ़ी इसे निभा रही है।
रावण का पुतला इस बार 75 फीट का होगा, जबकि कुंभकरण और मेघनाद के पुतले 65-65 फीट के बनाए जा रहे हैं। लंका की ऊँचाई आमतौर पर 120 फीट होती है, लेकिन इस बार इसे 80 से 100 फीट के बीच रखा गया है ताकि खेल मैदान प्रभावित न हो।
आतिशबाजी के लिए 1500 बम लाए जाएंगे, जिनमें से 1300 बम दहन में उपयोग होंगे। नगर परिषद उदयपुर के तत्कालीन सभापति युधिष्ठिर कुमावत ने नगर निगम के सहयोग से आतिशबाजी की परंपरा शुरू की थी। गांधी ग्राउंड में इस बार भी भव्य रंगीनी आतिशबाजी देखने को मिलेगी।
पुतले बनाने वाले कलाकार
पुतले बनाने के लिए मथुरा से आए कलाकार तीसरी पीढ़ी के हैं। आहूजा ने बताया कि रामलीला मूवी में रावण का पुतला इन्हीं कलाकारों ने बनाया था।
पुतलों को अभी अलग-अलग भागों में तैयार किया जा रहा है और रावण दहन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में तैयारी
गांधी ग्राउंड के अलावा अन्य कॉलोनी और कस्बों में भी रावण और अन्य पुतले तैयार किए जा रहे हैं। आयोजन समिति ने सभी तैयारियों का जायजा लिया और सुनिश्चित किया कि महोत्सव सुरक्षित, भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया जाए।
उदयपुर में इस बार का विजयादशमी महोत्सव न केवल भव्य पुतलों और आतिशबाजी के लिए चर्चा में है, बल्कि यह तीसरी पीढ़ी के कलाकारों द्वारा पारंपरिक कला को जीवित रखने का प्रतीक भी है।




