परिचय
उदयपुर जिले के बेकरिया थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। गोगुंदा-पिंडवाड़ा नेशनल हाईवे पर आकियावड़ पुलिया के पास दो ट्रेलर आपस में भिड़ गए। इस दुर्घटना में एक ट्रेलर चालक करीब आधे घंटे तक केबिन में फंसा रहा। घटना स्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों और हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने बड़ी मशक्कत के बाद चालक को बाहर निकाला और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया। इसी दौरान जब घायल को ले जाने पहुंची एंबुलेंस मौके पर खड़ी थी, तभी एक तेज रफ्तार कंटेनर ने एंबुलेंस को टक्कर मार दी। गनीमत रही कि पास खड़े पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए।
हादसे का सिलसिला
रविवार सुबह करीब गोगुंदा-पिंडवाड़ा नेशनल हाईवे पर अचानक जोरदार टक्कर की आवाज ने लोगों को चौंका दिया। एक ट्रेलर ने पीछे से दूसरे ट्रेलर में टक्कर मार दी। पीछे से टकराए ट्रेलर का केबिन पूरी तरह पिचक गया।
ड्राइवर महेंद्र सिंह (निवासी: ब्यावर) उसी केबिन में बुरी तरह फंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम को सूचना दी।
आधे घंटे तक चला रेस्क्यू
मौके पर पहुंची बेकरिया थाना पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने क्रेन और गैस कटर की मदद से ड्राइवर को निकालने का प्रयास शुरू किया। करीब 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद चालक को बाहर निकाला गया।
घायल चालक को तुरंत गोगुंदा सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार जारी है।
एंबुलेंस को कंटेनर ने मारी टक्कर
रेस्क्यू पूरा होने के कुछ ही समय बाद एक और हादसा हो गया। घायल को ले जाने आई एंबुलेंस जब मौके पर खड़ी थी, तभी एक तेज रफ्तार कंटेनर ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
एंबुलेंस के पास खड़े तीन-चार पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे। हालांकि एंबुलेंस को काफी नुकसान पहुंचा और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई।
ट्रैफिक पर पड़ा असर
हादसे के चलते हाईवे पर लंबा जाम लग गया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लगभग 40–45 मिनट की मशक्कत के बाद पुलिस ने रास्ता साफ कर ट्रैफिक बहाल किया।
चश्मदीदों के बयान
हादसे के वक्त मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया:
- “ट्रेलर की टक्कर इतनी जोरदार थी कि पीछे से टकराने वाले ट्रेलर का अगला हिस्सा पूरी तरह चिपक गया।”
- “हम लोगों ने ड्राइवर की चीखें सुनीं और तुरंत पुलिस को फोन किया।”
- “एंबुलेंस को लगी दूसरी टक्कर ने सबको डरा दिया, गनीमत रही कि पुलिसकर्मी समय रहते हट गए।”
पुलिस का बयान
हेड कॉन्स्टेबल ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, तुरंत टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। ड्राइवर की हालत स्थिर है। फिलहाल मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
मानवीय पहलू
यह हादसा फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि हाईवे पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों का लापरवाह संचालन कितनी बड़ी समस्या है। न केवल चालक बल्कि पुलिस, एंबुलेंस कर्मी और अन्य लोग भी इस लापरवाही की कीमत चुकाते हैं।

निष्कर्ष
उदयपुर हादसा इस बात का गंभीर सबक है कि हाईवे पर सुरक्षा मानकों और ट्रैफिक अनुशासन का पालन कितना जरूरी है। यदि तेज रफ्तार पर लगाम और नियमित निगरानी नहीं की गई, तो ऐसे हादसे आम लोगों की जान के लिए खतरा बने रहेंगे। प्रशासन को चाहिए कि हादसों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी, स्पीड लिमिट लागू करने और हाईवे सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जाए।



