प्रतापगढ़

“पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा का निधन: 7 बार विधायक और 3 बार राजस्थान कैबिनेट मंत्री, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार”

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पूर्व कैबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा का रविवार को अंबा माता में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुबह 11 बजे उनकी अंतिम यात्रा उनके आवास से मोक्ष धाम के लिए रवाना हुई। 11:45 बजे उनके पुत्र और मंत्री हेमंत मीणा ने मुखाग्नि दी और पार्थिव देह को पंचतत्व में विलीन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर से हेलिकॉप्टर द्वारा अंबा माता पहुंचे और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। वे हेलीपैड से सीधे नंदलाल मीणा के निवास पर पहुंचे और करीब 10 मिनट रुके।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित

अंतिम संस्कार के समय कई उच्च पदस्थ अधिकारी और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रही। इसमें डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, मंत्री गौतम दक, सांसद सीपी जोशी, विधायक श्रीचंद कपलानी, चंद्रभान सिंह आक्या, पूर्व विधायक अशोक नौलखा, पूर्व विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय, प्रदेश मंत्री पंकज पोरवाल, भाजपा प्रदेश मंत्री कन्हैया लाल मीणा, जिला कलेक्टर डॉ अंजलि राजोरिया और SP बी आदित्य शामिल थे।

जीवन और शिक्षा

नंदलाल मीणा का जन्म 25 जनवरी 1946 को प्रतापगढ़ जिले के अंबामाता खेड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता किशनलाल और माता देवीबाई थीं। उन्होंने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, उदयपुर से बी.ए. और एल.एल.बी. की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद वे सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो गए। 20 जून 1968 को उनकी शादी सुमित्रा देवी से हुई। उनके एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं।

राजनीतिक करियर

नंदलाल मीणा ने 1972 में पहला चुनाव लसाड़िया विधानसभा से लड़ा, लेकिन हार गए। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर उदयपुर ग्रामीण सीट से विधायक बने। जनता पार्टी के विभाजन के बाद, 1980 में भाजपा के गठन के समय मुंबई में मौजूद रहे और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। उन्होंने आदिवासी बहुल इलाकों में भाजपा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वे कुल 7 बार विधायक, एक बार सांसद और तीन बार राजस्थान सरकार में मंत्री रहे। वसुंधरा राजे सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। मंत्री रहते हुए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में हॉस्टल, एनीकट, सिंचाई योजनाओं और सड़क नेटवर्क का विकास किया। नंदलाल मीणा पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबी नेता के रूप में जाने जाते थे और उनके दोनों कार्यकाल में मंत्री रहे।

भील प्रदेश समर्थन और बाद की राजनीति

2016 में उन्होंने भील प्रदेश की मांग का समर्थन किया और इसके लिए मंत्री पद छोड़ने की पेशकश की। 2014 में उन्होंने इस मांग का विरोध किया था। 2018 में तबीयत खराब होने के कारण सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। उस समय उनकी जगह बेटे हेमंत मीणा को पार्टी ने विधानसभा चुनाव में टिकट दिया। 2023 के चुनाव में हेमंत ने जीत दर्ज की और उन्हें राजस्व मंत्री बनाया गया।

स्वास्थ्य और अंतिम समय

नंदलाल मीणा ने लंबी बीमारी के बाद अहमदाबाद के अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

निष्कर्ष

नंदलाल मीणा का जीवन राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी उत्थान के प्रति समर्पित रहा। 7 बार विधायक और 3 बार मंत्री के रूप में उनके योगदान ने प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में विकास की राह प्रशस्त की। उनका निधन न केवल परिवार और समर्थकों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि राजस्थान की राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है।