उदयपुर जिले के कुराबड़ क्षेत्र में गैस सिलेंडर ब्लास्ट की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे में झुलसी 7 वर्षीय मोनिका ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बच्ची का इलाज उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में चल रहा था। हादसे में घायल माता-पिता और बड़ी बहन की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
घटना का विवरण
यह हादसा सगतड़ी गांव का है, जहां तीन दिन पहले सुबह का समय अचानक मातम में बदल गया। 45 वर्षीय शंकरलाल मीणा अपनी पत्नी गीता मीणा (40) और बेटियों लोगरी (9) व मोनिका (7) के साथ घर पर थे। परिवार छत पर सोया हुआ था।
सुबह गीता मीणा चाय बनाने के लिए नीचे आईं और गैस स्टोव जलाने की कोशिश की। इसी दौरान गैस सिलेंडर से लीकेज के कारण अचानक भीषण ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना तेज था कि पूरे परिवार के कपड़े और शरीर आग की लपटों में घिर गए।
गंभीर रूप से झुलसे परिजन
हादसे में परिवार के चारों सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए। तुरंत उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से एमबी हॉस्पिटल, उदयपुर ले जाया गया। डॉक्टरों ने सभी को बर्न यूनिट में भर्ती किया। इलाज के दौरान 7 साल की मोनिका ने दम तोड़ दिया। वहीं शंकरलाल, गीता और बड़ी बेटी लोगरी की हालत अब स्थिर है।
अस्पताल में अफरा-तफरी
ब्लास्ट के बाद परिजन और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि घर से धुआं और आग निकलते ही आसपास हड़कंप मच गया। लोग दौड़कर पहुंचे और पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक पूरा परिवार झुलस चुका था। अस्पताल में मोनिका की मौत की खबर सुनकर परिजन फफक पड़े।
गैस सुरक्षा पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर से गैस सिलेंडर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार सिलेंडरों की ठीक से जांच नहीं होती और लीकेज की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गैस सिलेंडर और पाइपलाइन की नियमित जांच न होने से इस तरह की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

निष्कर्ष
उदयपुर का यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी है। मासूम मोनिका की मौत ने परिवार ही नहीं, पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे के बाद अब ग्रामीणों में यह मांग उठ रही है कि प्रशासन सिलेंडर वितरण और जांच व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।



