चित्तौड़गढ़ के रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट और सैनिक स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर शुक्रवार सुबह अचानक बम धमाकों की खबर फैल गई। कुछ ही मिनटों में जिलेभर में अफवाहें दौड़ गईं कि शहर पर आतंकवादी हमला हो गया है। रेलवे स्टेशन पर हुए काल्पनिक धमाके में 3 लोगों की मौत और 15 से अधिक के घायल होने की सूचना फैलने से लोग सहम गए।
NSG की गांडीव एक्सरसाइज
असल में यह सब एक राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल का हिस्सा था। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के कमांडो द्वारा गांडीव एक्सरसाइज नामक अभ्यास के तहत इन धमाकों की काल्पनिक स्थिति बनाई गई थी। इस अभ्यास का उद्देश्य यह परखना था कि अचानक किसी बड़े आतंकी हमले की स्थिति में स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपात सेवाएं कितनी तेजी और कुशलता से प्रतिक्रिया देती हैं।
चित्तौड़गढ़ को इस एक्सरसाइज के लिए राजस्थान का पहला जिला चुना गया है। मॉक ड्रिल का यह सिलसिला शनिवार दोपहर तक जारी रहेगा।
रेलवे स्टेशन पर धमाके का अभ्यास
अभ्यास की शुरुआत चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से हुई। यहां काल्पनिक रूप से जोरदार बम धमाका दिखाया गया, जिसमें 3 मौतें और करीब 15 लोग घायल बताए गए। अफरा-तफरी के बीच फायर ब्रिगेड, जिला पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। घायलों को स्ट्रेचर पर डालकर अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान स्टेशन पर एक संदिग्ध अटैची भी मिली, जिसे बम डिटेक्टर से चेक किया गया। एनएसजी की विशेष टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया।
कलेक्ट्रेट में धमाके से दहशत
इसके बाद अभ्यास का दूसरा चरण कलेक्ट्रेट परिसर में किया गया। यहां बम ब्लास्ट की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें 2 लोग घायल हुए। फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और एंबुलेंस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने तुरंत पूरे क्षेत्र को सील कर दिया और बम डिटेक्टर मशीन से चप्पे-चप्पे की जांच की गई।

सैनिक स्कूल में आतंकियों की घुसपैठ का सीन
अगला पड़ाव सैनिक स्कूल रहा, जहां आतंकवादियों की घुसपैठ और बच्चों की सुरक्षा का अभ्यास किया गया। स्कूल परिसर से बच्चों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एनएसजी कमांडो ने सर्च ऑपरेशन चलाकर संदिग्धों की तलाश की। सायरन बजते रहे और पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया, मानो वास्तव में आतंकी हमला हुआ हो।
प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर
एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर की एक्सरसाइज का उद्देश्य केवल सुरक्षा तैयारियों की परख करना है। अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग परिदृश्य बनाकर पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और एनएसजी टीम को सक्रिय किया गया।
पूरे जिले में नाकाबंदी और जांच
मॉक ड्रिल के दौरान पूरे जिले में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं। प्रमुख मार्गों पर नाकाबंदी कर गाड़ियों की जांच हुई। बस स्टैंड, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया। आम लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा को लेकर जागरूक किया गया।
लोगों में डर और राहत
इस अचानक हुई ड्रिल ने शुरुआत में लोगों में भय और भ्रम फैला दिया। रेलवे स्टेशन और कलेक्ट्रेट में सायरन बजने, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की आवाजाही से लगा कि सचमुच कोई बड़ा हमला हुआ है। लेकिन थोड़ी देर में जब यह जानकारी सामने आई कि यह सब मॉक ड्रिल का हिस्सा है, तब लोगों ने राहत की सांस ली।
सुरक्षा व्यवस्था की परख
यह मॉक ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा भी थी। प्रशासन का कहना है कि ऐसे अभ्यास से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का अनुभव बढ़ता है और आम जनता भी सुरक्षा के प्रति जागरूक होती है।

निष्कर्ष
चित्तौड़गढ़ में हुई यह गांडीव एक्सरसाइज देशभर के लिए एक मिसाल है। यह दिखाता है कि किसी भी आकस्मिक आतंकी हमले की स्थिति में हमारी सुरक्षा एजेंसियां कितनी तैयार हैं। डर और दहशत के बीच भी इस अभ्यास ने यह भरोसा दिलाया कि प्रशासन और सुरक्षा बल हर चुनौती से निपटने के लिए तत्पर हैं।



