चित्तौड़गढ़

शरद पूर्णिमा पर सांवलिया जी मंदिर में रात 12 बजे हुई विशेष आरती, 10 क्विंटल खीर से भक्त हुए मंत्रमुग्ध

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चित्तौड़गढ़: मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री सांवलिया जी मंदिर में सोमवार देर रात शरद पूर्णिमा का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर रात 12 बजे भगवान श्री सांवलिया सेठ की विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। आरती के पश्चात भक्तों को लगभग 10 क्विंटल खीर का प्रसाद बांटा गया, जिसे पाने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया।


रात 12 बजे की विशेष आरती ने भक्तों को किया मंत्रमुग्ध

मंदिर परिसर में शाम से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे रात करीब 11 बजे हुई, मंदिर परिसर खचाखच भर गया। इस समय भगवान के पट बंद कर दिए गए ताकि आधी रात को विशेष पूजा की तैयारियां की जा सकें।

रात के 12 बजे जैसे ही शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त शुरू हुआ, मंदिर में आरती की घंटियां गूंज उठीं। पूरे परिसर में “जय सांवरा सेठ” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों की आवाज़ें गूँज उठीं। भक्त अपनी भक्ति में डूबते हुए आरती में शामिल हुए। इसके बाद ठाकुर जी को खीर का भोग लगाया गया, जिसे प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया गया।


भक्तों के लिए खीर का भोग, 10 क्विंटल प्रसाद बांटा गया

इस अवसर पर मंदिर प्रशासन ने लगभग 10 क्विंटल खीर तैयार की थी। प्रसाद वितरण के दौरान भक्तों में उत्साह चरम पर था। कई श्रद्धालु अपने घरों से बर्तन, डिब्बे और टिफिन लेकर आए थे ताकि वे खीर का प्रसाद भरकर अपने घर ले जा सकें।

मंदिर के बाहर और अंदर दोनों जगह प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान मंदिर मंडल ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए। मंडफिया थाना पुलिस और मंदिर सुरक्षा गार्ड लगातार भीड़ पर नजर बनाए हुए थे, ताकि किसी प्रकार की अफरा-तफरी न मचे और सभी श्रद्धालु सुचारु रूप से प्रसाद ग्रहण कर सकें।


शरद पूर्णिमा और खीर का भोग: धार्मिक महत्व

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण को खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत रस बरसता है, इसलिए लोग खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रखते हैं और फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

भक्ति और उल्लास का माहौल पूरे रात मंदिर परिसर में बना रहा। दूर-दूर से श्रद्धालु केवल इस पर्व के दर्शन और प्रसाद पाने के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर में आकर्षक सजावट की गई थी और रोशनी से सारा परिसर जगमगा रहा था। भोर तक भक्तों का आना-जाना जारी रहा।


भक्तों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ

श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इस परंपरा को लेकर बेहद उत्साहित नजर आए। कई भक्तों ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात की आरती और खीर का प्रसाद उनकी धार्मिक आस्था को और मजबूत करता है। कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि यह अवसर उन्हें अपने परिवार और बच्चों के साथ भगवान की भक्ति में डूबने का मौका देता है।

स्थानीय लोगों ने भी मंदिर प्रशासन की प्रशंसा की कि प्रसाद वितरण और सुरक्षा दोनों पर पूरी तरह ध्यान दिया गया। इससे मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।


मंदिर की सजावट और विशेष आयोजन

श्री सांवलिया जी मंदिर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया। मंदिर में रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और भव्य मंच की व्यवस्था की गई थी। पूरा परिसर भक्तों के लिए आकर्षक और भक्ति से भरपूर माहौल तैयार कर रहा था।

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि इस परंपरा को बरकरार रखने का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना है, बल्कि समुदाय में सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूत करना है।


निष्कर्ष

शरद पूर्णिमा की रात श्री सांवलिया जी मंदिर में हुई विशेष आरती और 10 क्विंटल खीर का प्रसाद वितरण भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि समुदाय में उल्लास और भक्ति का माहौल भी कायम रखा। मंदिर परिसर में पूरी रात की गई सजावट, सुरक्षा इंतजाम और प्रसाद वितरण ने यह सुनिश्चित किया कि इस पर्व का आनंद सभी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और सुरक्षित वातावरण में ले सकें।

इस प्रकार, सांवरा सेठ के दरबार में शरद पूर्णिमा का यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि मेवाड़ की सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है।