मन्दसौर

हाईकोर्ट का सवाल- क्या युवक 10 साल इंतजार करेगा? : NDPS केस में मंदसौर SP ने मानी गलती, 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड; छात्र को बस से जबरन पकड़ा था

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मंदसौर के मल्हारगढ़ में 18 वर्षीय छात्र को बस से उतारकर NDPS एक्ट के तहत अफीम तस्करी केस में फंसाने के आरोपों की सुनवाई मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई। अदालत के सवालों पर मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा खुद पेश हुए और स्वीकार किया कि छात्र को उठाने वाली पुलिस टीम मल्हारगढ़ थाने की ही थी। उन्होंने बताया कि मामले में जांच प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, जिसके चलते 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पूरी बहस के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि पहले पेश हुए जांच अधिकारी ने गलत जानकारी क्यों दी थी? एसपी इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके और बताया कि मामले में गंभीर त्रुटियां हुई हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मल्हारगढ़ थाने में 55 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं, फिर भी विधिक प्रक्रिया का सही से पालन नहीं किया गया।

सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जिस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है कि तो क्या युवक 10 साल तक फैसले का इंतजार करेगा? लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया।

पुलिस ने युवक को बस से पकड़ा था

29 अगस्त 2025 को 18 साल का सोहन मंदसौर से प्रतापगढ़ सफर कर रहा था। तभी बस में तीन-चार लोग चढ़े और युवक को पकड़कर ले गए। बस में सीसीटीवी फुटेज लगे थे, जिसमें पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई।युवक को मल्हारगढ़ थाने ले जाकर उस पर 2 किलो 700 ग्राम से अधिक अफीम रखने का केस दर्ज किया गया। अगले दिन उसे मंदसौर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

परिजनों ने एडवोकेट हिमांशु ठाकुर से संपर्क कर बताया कि सोहन 12वीं में फर्स्ट डिवीजन से पास हुआ होनहार छात्र है। आगे पीएससी की तैयारी करने वाला था। 29 अगस्त को वह मंदसौर बस से रिश्तेदारों से मिलने आया था, जहां पुलिस ने बस रोककर उसे जबर्दस्ती उतारा और झूठे केस में फंसा दिया।

सीसीटीवी फुटेज ने मामला पलट दिया

परिजनों ने कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैवल्स कंपनी से बस का सीसीटीवी फुटेज हासिल किया। वीडियो में साफ दिखा कि 29 अगस्त की सुबह 11:39 बजे कुछ पुलिसकर्मी बस में चढ़े। सफेद शर्ट पहने सोहन को जबर्दस्ती बस से उतारा गया।

उसी दिन शाम 5:17 बजे उसके खिलाफ अफीम बरामदगी का केस दर्ज कर दिया गया ये फुटेज हाईकोर्ट में पेश किए गए, जिससे पुलिस का दावा गलत साबित हुआ।

पहले सुनवाई में पुलिस ने कोर्ट को भटकाया था

5 दिसंबर की सुनवाई में पुलिस ने कहा था कि बस से युवक को उठाने वाले पुलिसकर्मी मल्हारगढ़ के नहीं थे। लेकिन फोटो और वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने इसे गलत पाया। इसके बाद हाईकोर्ट ने एसपी को खुद उपस्थित होने का आदेश दिया था।

अफीम के केस में 10 से 20 साल की सजा का प्रावधान

2.714 किलो अफीम की जब्ती एनडीपीएस एक्ट के तहत गंभीर अपराध है, जिसमें 10 से 20 साल तक की सजा हो सकती है। मंदसौर-नीमच क्षेत्र में ऐसे मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, इसलिए कार्रवाई बेहद संवेदनशील मानी जाती है। लेकिन इस केस में गिरफ्तारी की प्रक्रिया संदिग्ध रही। कोर्ट ने माना कि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।